नेपाल में तूफ़ानः 'सेकेंड के कुछ हिस्से में मेरी जान बची'
नेपाल के दक्षिणी इलाके में आए भयंकर तूफ़ान में कम से कम 30 लोगों के मारे जाने और सैकड़ों लोगों के घायल होने की ख़बर है.
अधिकारियों के अनुसार, तूफ़ान इतना ताक़तवर था कि इससे कई घर ध्वस्त हो गए, गाड़ियां पलट गईं, पेड़ गिर गए और बिजली के खंभे गिर गए.
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि सवारियों से भरी एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए.
70 साल की कुसुम कालू ने बीबीसी को बताया कि तूफ़ान के समय वो बाल बाल बचीं.
बारा ज़िले में उन्होंने बीबीसी नेपाली को बताया, "मैं बस घर से निकलने वाली थी और जैसे ही मैंने दरवाज़ा खोला छत गिर गई."
वो कहती हैं, "अगर मैं घर में सो गई होती या कुछ सेकेंड देरी से दरवाजा खोला होता तो, मुझे नहीं लगता कि मैं बची होती."
बारा के बालबारियम की रहने वाली द्रौपदी देवी ने बीबीसी को बताया कि उनके गांव का हर घर क्षतिग्रस्त हो गया है.
राहत और बचाव कार्य जारी
वो कहती हैं कि तूफ़ान के समय दीवार उनके ऊपर गिर पड़ी, किसी तरह मलबे से वो लोग बाहर निकाले गए.
पत्रकारों का कहना है कि नेपाल में बसंत के दौरान तूफ़ान आना कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन इनमें शायद कोई इतनी तबाही मचाते हों.
एक वालंटियर प्रकाश थारू ने कहा, "तूफ़ान ने अपने रास्ते में आई हर चीज़ को नष्ट किया. घरों के ऊपर छतें नहीं हैं और पेड़ धाराशाई हुए पड़े हैं."
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि सरकार घायलों की हर संभव मदद करने की कोशिश कर रही है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक देश में 30 करोड़ यूज़र्स वाली कंपनी फ़ेसबुक ने सोमवार को बताया है कि उसकी जांच में पाया गया कि कई फ़ेक अकाउंट वाले यूज़र्स इन ग्रुप का हिस्सा थे . इन अकाउंट ने कई अन्य ग्रुप से भी खुद को जोड़ रखा था ताकि इस ग्रुप की सामग्री का प्रसार कर सकें.
फ़ेसबुक ने बताया कि इस पन्ने पर कई स्थानीय समाचार और सत्ता पक्ष के नेता नरेंद्र मोदी की आलोचनाओं से भरे पोस्ट शेयर किए जा रहे थे.
फ़ेसबुक ने अपने जारी बयान में ये भी बताया है कि उसने अहमदाबाद की आईटी कंपनी सिल्वर टच से जुड़े 15 फ़ेसबुक पेज भी हटा दिए हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ये कंपनी प्रधानमंत्री मोदी के नमो एप से ताल्लुक रखती है.
इसके अलावा कंपनी की बेवसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक उसने मेक इन इंडिया मोबाइल एप और प्रवासी भारतीय दिवस इंडिया की बेवसाइट सहित केंद्र और राज्य सरकार के लिए कई वेबसाइट और एप भी डिज़ाइन किए हैं.
इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया, '' बीजेपी के समर्थन वाले पेज सिल्वर टच कंपनी ने बनाए थे जिसे फ़ेसबुक ने हटा दिया है. इन पेजों पर 26 लाख फ़ालोवर थे और इन पर 79 हज़ार डॉलर खर्च किए गए थे.''
फ़ेसबुक के साइबर सेक्योरिटी नीतियों के प्रमुख नेथेनील ग्लेइशेर ने कहा, ''इस पन्ने पर एक्टिव यूजर्स ने अपनी पहचान छुपाए रखा था, साथ ही हमारी समीक्षा में हमने पाया कि ये अकाउंट कांग्रेस के आईटी सेल से ही जुड़े लोगों के थे.''
उन्होंने आगे कहा कि फ़ेसबुक ने इस सभी अकाउंट को इनकी गतिविधियों के आधार पर अपने प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया है.
अधिकारियों के अनुसार, तूफ़ान इतना ताक़तवर था कि इससे कई घर ध्वस्त हो गए, गाड़ियां पलट गईं, पेड़ गिर गए और बिजली के खंभे गिर गए.
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि सवारियों से भरी एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए.
70 साल की कुसुम कालू ने बीबीसी को बताया कि तूफ़ान के समय वो बाल बाल बचीं.
बारा ज़िले में उन्होंने बीबीसी नेपाली को बताया, "मैं बस घर से निकलने वाली थी और जैसे ही मैंने दरवाज़ा खोला छत गिर गई."
वो कहती हैं, "अगर मैं घर में सो गई होती या कुछ सेकेंड देरी से दरवाजा खोला होता तो, मुझे नहीं लगता कि मैं बची होती."
बारा के बालबारियम की रहने वाली द्रौपदी देवी ने बीबीसी को बताया कि उनके गांव का हर घर क्षतिग्रस्त हो गया है.
राहत और बचाव कार्य जारी
वो कहती हैं कि तूफ़ान के समय दीवार उनके ऊपर गिर पड़ी, किसी तरह मलबे से वो लोग बाहर निकाले गए.
पत्रकारों का कहना है कि नेपाल में बसंत के दौरान तूफ़ान आना कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन इनमें शायद कोई इतनी तबाही मचाते हों.
एक वालंटियर प्रकाश थारू ने कहा, "तूफ़ान ने अपने रास्ते में आई हर चीज़ को नष्ट किया. घरों के ऊपर छतें नहीं हैं और पेड़ धाराशाई हुए पड़े हैं."
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि सरकार घायलों की हर संभव मदद करने की कोशिश कर रही है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक देश में 30 करोड़ यूज़र्स वाली कंपनी फ़ेसबुक ने सोमवार को बताया है कि उसकी जांच में पाया गया कि कई फ़ेक अकाउंट वाले यूज़र्स इन ग्रुप का हिस्सा थे . इन अकाउंट ने कई अन्य ग्रुप से भी खुद को जोड़ रखा था ताकि इस ग्रुप की सामग्री का प्रसार कर सकें.
फ़ेसबुक ने बताया कि इस पन्ने पर कई स्थानीय समाचार और सत्ता पक्ष के नेता नरेंद्र मोदी की आलोचनाओं से भरे पोस्ट शेयर किए जा रहे थे.
फ़ेसबुक ने अपने जारी बयान में ये भी बताया है कि उसने अहमदाबाद की आईटी कंपनी सिल्वर टच से जुड़े 15 फ़ेसबुक पेज भी हटा दिए हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ये कंपनी प्रधानमंत्री मोदी के नमो एप से ताल्लुक रखती है.
इसके अलावा कंपनी की बेवसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक उसने मेक इन इंडिया मोबाइल एप और प्रवासी भारतीय दिवस इंडिया की बेवसाइट सहित केंद्र और राज्य सरकार के लिए कई वेबसाइट और एप भी डिज़ाइन किए हैं.
इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया, '' बीजेपी के समर्थन वाले पेज सिल्वर टच कंपनी ने बनाए थे जिसे फ़ेसबुक ने हटा दिया है. इन पेजों पर 26 लाख फ़ालोवर थे और इन पर 79 हज़ार डॉलर खर्च किए गए थे.''
फ़ेसबुक के साइबर सेक्योरिटी नीतियों के प्रमुख नेथेनील ग्लेइशेर ने कहा, ''इस पन्ने पर एक्टिव यूजर्स ने अपनी पहचान छुपाए रखा था, साथ ही हमारी समीक्षा में हमने पाया कि ये अकाउंट कांग्रेस के आईटी सेल से ही जुड़े लोगों के थे.''
उन्होंने आगे कहा कि फ़ेसबुक ने इस सभी अकाउंट को इनकी गतिविधियों के आधार पर अपने प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया है.
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